15
Sep
Posted by विनय in मेरी नज़्म. Tagged: adore, इबादत, इब्तिदा, इश्क़, ख़ुशगँवारियाँ, जन्म, तख़लीक़, दम, प्यार, मुट्ठी, मुक़ाम, मोहब्बत, विनय, सोच, स्पर्श, हाथ, हासिल, क़िस्मत, beauty, begin, birth, breath, creation, destiny, fate, final destination, fist, gain, hand, life, love, power, start, thought, touch, vinay. Leave a Comment
मेरे ही हाथों में टूटा है दम मेरा,
तेरे ही स्पर्श से तख़लीक़ हुआ है
यह ‘विनय’
अभी-अभी मेरी मुट्ठी में
जन्मी है यह क़िस्मत
खुलेगी जो कई और कई
हासिलों के मुक़ाम आयेंगे
जिससे मेरी हर सोच जुड़ी है
वह सिर्फ़ एक तुम्हीं हो
मेरी इब्तिदा, ये ख़ुशगँवारियाँ
सब तुम्हीं से तो हैं
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३