15
Sep
Posted by विनय in मेरी नज़्म. Tagged: इश्क़, चाँद, चिराग़, चौखट, जानिब, दीपावली, दीवाली, दुल्हन, नवेली, पटाखे, प्यार, मेहताब, मोहब्बत, रंगीन, रोशनियाँ, लिबास, शामीन, शोर, ज़मीं, beautiful like evening, bride, cloth, colourful, crakers, deepawali, diwali, earth, floor, lamp, lights, loud, love, moon, new, side, sound, threshold. Leave a Comment
एक बार देखा था तुझे
हाथों में चिराग़ लिए
चौखट पर खड़ी थी
चाँद की निगाहें
तुझ पर टिकी थीं
सारी ज़मीं
नवेली दुल्हन की तरह सजी थी
कानों में पटाखों का शोर
और आँखों में मेहताब की
रंगीन रोशनियाँ थीं
कुछ शामीन से
लिबास में थी तू
और मैं तेरे ही जानिब
देखे जा रहा था
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००२