बारिश, बूँदें, पत्ते, मिट्टी -सौंधी
रात, चाँद, तारे, निगाह -मेरी
मरासिम लफ़्ज़ों से नहीं होते
एहसास से होते हैं,
अश्क जो आँखों में उतर आयें
फिर पलकें भिगोते हैं…
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३
15 Sep
Posted by विनय in मेरी नज़्म. Tagged: अश्क, आँखें, इश्क़, एहसास, चाँद, तारे, निगाह, पत्ते, पलकें, प्यार, बारिश, बूँदें, मरासिम, मिट्टी, मोहब्बत, रात, लफ़्ज़, drops, eyebrow, eyes, feelings, leaves, love, moon, night, rain, realtion, sand, sight, stars, tears, words. Leave a Comment
बारिश, बूँदें, पत्ते, मिट्टी -सौंधी
रात, चाँद, तारे, निगाह -मेरी
मरासिम लफ़्ज़ों से नहीं होते
एहसास से होते हैं,
अश्क जो आँखों में उतर आयें
फिर पलकें भिगोते हैं…
Blog at WordPress.com. Theme: SpringLoaded by the449.