वो तस्कीं
न मेरे दर पे माथा टेके
न ही रौज़न से झाँके
सिर्फ़ -
खा़बों को बे-रब्त किए घूमती है
हर गली हर कूचे में
मशहूर हैं,
उसकी वफ़ा के क़िस्से
मगर अब कि
वाक़िया हमारा मशहूर होगा
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: १३/जून/२००३
15 Sep
Posted by विनय in मेरी नज़्म. Tagged: इश्क़, किस्सा, कूचा, ख़ाब, गली, तस्कीं, दर, प्यार, बेरब्त, मशहूर, माथा, मोहब्बत, रौज़न, वाक़िया, वफ़ा, chaos, comfort, door, dream, famous, friendship, head, love, story, street, window. Leave a Comment
वो तस्कीं
न मेरे दर पे माथा टेके
न ही रौज़न से झाँके
सिर्फ़ -
खा़बों को बे-रब्त किए घूमती है
हर गली हर कूचे में
मशहूर हैं,
उसकी वफ़ा के क़िस्से
मगर अब कि
वाक़िया हमारा मशहूर होगा
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