15
Sep
Posted by विनय in मेरी नज़्म. Tagged: attraction, अजनबी, इनायत, इश्क़, उन्स, काग़ज़, खा़मोश, खु़दा, खु़श्क, चेहरा, पन्ने, परे, प्यार, मरहबा, मुताबिक़, मोहब्बत, लब, लम्स, लफ़्ज़, सँभाला, समझ, सादगी, सादा, हसीन, beautiful, beyond, blank, dry, face, gift, god, hands, help, in response, like that, lips, love, page, silent, simplicity, stranger, touch, understanding, words, wow. Leave a Comment
एक खु़श्क खा़मोश हसीन चेहरा
बिल्कुल सादा काग़ज़ की तरह
कि आपके लबों को लफ़्ज़ मिलें
और वह मुताबिक़ बदल जाये…
एक जैसे थे दोनों
मेरी मोहब्बत और उसकी सादगी
इनायत ऐसी
कि खु़दा भी मरहबा कह दे…
आज यह उन्स कैसा लम्स कैसे
अजनबी कुछ पन्ने खुलने लगे
इक बार फिर मैं अपनी समझ से परे हो गया
वह मुझको सँभाला दे…
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: १३/जून/२००३