एक अधूरी ख़ाहिश लिए
मैं भटक रहा हूँ
दर-ब-दर,
सुनसान ख़ाली सड़कों पर
अँधेरा ही अँधेरा है,
इन अँधेरों ने मेरे
हाथ-पाँव बाँध दिए हैं
और ये तन्हाई
मेरा गला घोंट रही है
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: १८/अगस्त/२००४
15 Sep
Posted by विनय in मेरी नज़्म. Tagged: alone, अँधेरा, इश्क़, ख़ाली, ख़ाहिश, गला, तन्हाई, पाँव, प्यार, मोहब्बत, सड़क, सुनसान, हाथ, blank, dark, desire, empty, feet, hand, love, neck, road, solitude, sound, way. Leave a Comment
एक अधूरी ख़ाहिश लिए
मैं भटक रहा हूँ
दर-ब-दर,
सुनसान ख़ाली सड़कों पर
अँधेरा ही अँधेरा है,
इन अँधेरों ने मेरे
हाथ-पाँव बाँध दिए हैं
और ये तन्हाई
मेरा गला घोंट रही है
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