किसी का दर्दे-दिल प्यारे तुम्हारा नाज़ क्या समझे
जो गुज़रे सैद१ के दिल पर उसे शहबाज़२ क्या समझे
रिहा करना हमें सैयाद३ अब पामाल करना है
फड़कना भी जिसे भूला हो सो परवाज़४ क्या समझे
न पूछो मुझसे मेरा हाल टुक५ दुनिया में जीने दो
खुदा जाने मैं क्या बोलूँ कोई ग़म्माज़६ क्या समझे
कहा चाहे था तुझसे मैं लेकिन दिल [...]
Archive for August 10th, 2007
10 Aug




















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